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♦️♦️♦️ कर्म का भोग♦️♦️♦️♦️

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❣️कर्मफल का भोग टलता नहीं  🏵️ 🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅 💡एक राजा बड़ा धर्मात्मा, न्यायकारी और परमेश्वर का भक्त था। उसने ठाकुरजी का मंदिर बनवाया और एक ब्राह्मण को उसका पुजारी नियुक्त किया । वह ब्राह्मण बड़ा सदाचारी, धर्मात्मा और संतोषी था। वह राजा से कभी कोई याचना नहीं करता था, राजा भी उसके स्वभाव पर बहुत प्रसन्न था। उसे राजा के मंदिर में पूजा करते हुए बीस वर्ष गुजर गये। उसने कभी भी राजा से किसी प्रकार का कोई प्रश्न नहीं किया । 🔅राजा के यहाँ एक लड़का पैदा हुआ। राजा ने उसे पढ़ा लिखाकर विद्वान बनाया और बड़ा होने पर उसकी शादी एक सुंदर राजकन्या के साथ करा दी। शादी करके जिस दिन राजकन्या को अपने राजमहल में लाये उस रात्रि में राजकुमारी को नींद न आयी । वह इधर-उधर घूमने लगी जब अपने पति के पलंग के पास आयी तो क्या देखती है कि हीरे जवाहरात जड़ित मूठेवाली एक तलवार पड़ी है ।  जब उस राजकन्या ने देखने के लिए वह तलवार म्यान में से बाहर निकाली, तब तीक्ष्ण धारवाली और बिजली के समान प्रकाशवाली तलवार देखकर वह डर गयी व डर के मारे उसके हाथ से तलवार गिर पड़ी और राजकुमार की गर्दन पर जा लगी । राजकुमार का सिर कट...

गुस्सा जो उतर जाए.....

गुस्सा जो उतर जाए तो प्यार मांग लेना !! स्नेह जाग जाए, अधिकार मांग लेना!! दो दिन मिले हैं मुझको,  ऐसे ही न बिता देना !! कुछ यूं करो जतन कि, आंसू भी गीत गाएं !! जो मन को जीत लेगा, जीत होगी तो उसी की!! हर सांस साज होगी, जीवन में प्रीत होगी!! जो दिल गुनगुनाए, वो गीत गा लेना!! गुस्सा जो उतर जाए तो प्यार मांग लेना !!  स्नेह जाग जाए, अधिकार मांग लेना!! जीवन को पार करेंगें, सुख दुःख को साथ लेकर !! दुःख की नदी बड़ी है, हिम्मत ना हार जाना !! आशा की नाव से है, उस पार हमको जाना!! जब जी में तेरे आए मेरा साथ मांग लेना !!  गुस्सा जो उतर जाए तो प्यार मांग लेना !! स्नेह जाग जाए, अधिकार मांग लेना!! नीरज शुक्ला की कलम से.......

राष्ट्र रक्षा सूत्र

भारत के   चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ  विपिन रावत  ने कहा  है कि भारत का हर व्यक्ति भारतीय सेना के बारे में नीचे लिखे वाक्यों को अवश्य पढ़े। आपसे सादर आग्रह है कि कृपया इन अमूल्य 'राष्ट्र रक्षा सूत्रों' को विभिन्न माध्यमों से अधिक से अधिक देशवासियों तक पहुँचाने में सहयोग कीजिए. ✌🎖 भारतीय सेना 10 सर्वश्रेष्ठ अनमोल वचन: अवश्य पढें। इन्हें पढकर सच्चे गर्व की अनुभूति होती है... 1. " मैं तिरंगा फहराकर वापस आऊंगा या फिर तिरंगे में लिपटकर आऊंगा, लेकिन मैं वापस अवश्य आऊंगा।" - कैप्टन विक्रम बत्रा,   परम वीर चक्र 2. " जो आपके लिए जीवनभर का असाधारण रोमांच है, वो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी है। " - लेह-लद्दाख राजमार्ग पर साइनबोर्ड (भारतीय सेना) 3. " यदि अपना शौर्य सिद्ध करने से पूर्व मेरी मृत्यु आ जाए तो ये मेरी कसम है कि मैं मृत्यु को ही मार डालूँगा।" - कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे, परम वीर चक्र, 1/11 गोरखा राइफल्स 4. " हमारा झण्डा इसलिए नहीं फहराता कि हवा चल रही होती है, ये हर उस जवान की आखिरी साँस से फहराता है जो इसकी रक्षा में अपने प्र...

नया साल कब से

ना तो जनवरी साल का पहला मास है और ना ही 1 जनवरी पहला दिन.... (आज से 3 वर्ष पहले मेरे द्वारा लिखा गया एक रोचक लेख) अगर आप भी आज तक जनवरी को पहला महीना मानते आए है, तो इस लेख को पढ़कर कृपया पुनः विचार करिए। तथ्य नं:-1 हिन्दी में सात को सप्त, आठ को अष्ट कहा जाता है, इसे अग्रेज़ी में sept(सेप्ट) तथा oct(ओक्ट) कहा जाता है... ऐसे ही nov=9 और dec=10 इसके अनुसार तो सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर क्रम से 7वाँ, 8वाँ, 9वाँ और 10वाँ महीना होना चाहिए जबकि ऐसा नहीं है   ये क्रम से 9वाँ,10वाँ,11वां और12वाँ महीना है।  तथ्य नं:- 2 1752(calendar act 1751, England देखे) के पहले दिसंबर दसवाँ महीना ही हुआ करता था। और नव वर्ष 25 मार्च को मनाया जाता था।  http://www.adsb.co.uk/date_and_time/calendar_reform_1752/ इसका एक प्रमाण और है .. जरा विचार करिए कि 25 दिसंबर यानि क्रिसमस को X-mas क्यों कहा जाता है???? इसका उत्तर ये है की "X" रोमन लिपि में दस का प्रतीक है और mas यानि मास अर्थात महीना। चूंकि दिसंबर दसवां महीना हुआ करता था,इसलिए 25 दिसंबर दसवां महीना यानि X-mas से प...

धर्मान्तरण का सच

धर्मान्तरण का सच  ••••••••••••••••••••••••••• जब मोरारजी देसाई की सरकार में धर्मांतरण के विरुद्ध बिल पेश हुआ तो मदर टेरेसा ने प्रधान मंत्री को पत्र लिख कर कहाँ था की ईसाई समाज सभी समाज सेवा की गतिविधिया जैसे की शिक्षा, रोजगार, अनाथालय आदि को बंद कर देगा अगर उन्हें अपने ईसाई मत का प्रचार करने से रोका जायेगा। तब प्रधान मंत्री देसाई ने कहा था इसका अर्थ क्या यह समझा जाये की ईसाईयों द्वारा की जा रही समाज सेवा एक दिखावा मात्र हैं और उनका असली प्रयोजन तो धर्मान्तरण हैं। यही मदर टेरेसा दिल्ली में दलित ईसाईयों के लिए आरक्षण की हिमायत करने के लिए धरने पर बैठी थी। मोहन दास गाँधी ने एक बार कहा ए था कि -- "यदि ईसाई मिशनरी स्वयं को मानवीय कार्य एवं गरीबो को भौतिक सेवाएँ देने में लगाने के स्थान पर चिकित्सा ,सहायता ,शिक्षा का उपयोग धर्मान्तरण के लिए करती है ,तो मै निश्चित रूप से उन्हें देश छोड़ कर जाने के लिए कहूँगा ।प्रत्येक राष्ट्र का धर्म उस राष्ट्र के लिए उपयुक्त होता है ,भारत का भी धर्म निश्चित रूप से भारत के लोगो के लिए उपयुक्त है ।हमें धर्मान्तरण करने वाली आध्यात्मिकता की आवश्यकता...

घूंघट वाली ओट नदारद

🤨🤨 आया दौर फ्लैट कल्चर का, देहरी, आंगन, धूप नदारद। हर छत पर पानी की टंकी, ताल, तलैया, कूप नदारद।। लाज-शरम चंपत आंखों से, घूँघट वाला रूप नदारद। पैकिंग वाले चावल, दालें, डलिया,चलनी, सूप नदारद।। 🤨🤨 बढ़ीं गाड़ियां, जगह कम पड़ी,  सड़कों के फुटपाथ नदारद। लोग हुए मतलबपरस्त सब, मदद करें वे हाथ नदारद।। मोबाइल पर चैटिंग चालू, यार-दोस्त का साथ नदारद। बाथरूम, शौचालय घर में, कुआं, पोखरा बाथ नदारद।। 🤨🤨 हरियाली का दर्शन दुर्लभ, कोयलिया की कूक नदारद। घर-घर जले गैस के चूल्हे, चिमनी वाली फूंक नदारद।। मिक्सी, लोहे की अलमारी, सिलबट्टा, संदूक नदारद। मोबाइल सबके हाथों में, विरह, मिलन की हूक नदारद।। 🤨🤨 बाग-बगीचे खेत बन गए, जामुन, बरगद, रेड़ नदारद। सेब, संतरा, चीकू बिकते गूलर, पाकड़ पेड़ नदारद।। ट्रैक्टर से हो रही जुताई, जोत-जात में मेड़ नदारद। रेडीमेड बिक रहा ब्लैंकेट, पालों के घर भेड़ नदारद।। 🤨🤨 लोग बढ़ गए, बढ़ा अतिक्रमण, जुगनू, जंगल, झाड़ नदारद। कमरे बिजली से रोशन हैं, ताखा, दियना, टांड़ नदारद।। चावल पकने लगा कुकर में, बटलोई का मांड़ नदारद। कौन चबाए चना-चबेना, भ...

Our Thoughts Create Our Destiny

Spiritual wisdom teaches us that happiness is independent of our accomplishments, possessions and relationships. Yet, some days we feel pleasant, some days anxious. Some days we are enthusiastic, some days dull. This means that sometimes our feelings are not in our control. The fact is that each of us can create feelings and destiny of our choice using Thought Power. How do thoughts manifest destiny? Answer is in a simple chain moving forward sequentially from our thoughts to feelings, attitude, actions, habits, personality and destiny. Let us understand how they work. 1. My Every Thought Generates My Feeling. Thoughts are my creation. Every thought gives rise to a feeling, so how I feel is decided by the quality of my thought. So if I consciously create a pure, positive thought, I feel happy. Happiness is a feeling, an emotion and an experience I go through. Likewise I also experience feelings like peace, love, pain, anger. Suppose I create a thought -  I enjoy working in this ...

गोपीनाथ पांडुरंग मुंडे जी

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गोपीनाथ पांडुरंग मुंडे   गोपीनाथ पांडुरंग मुंडे एक भारतीय राजनेता और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री थे। 1995 में हुये विधानसभा के चुनावों में उन्होंने सफलता पाई और महाराष्ट्र राज्य के उपमुख्यमंत्री बने। उन्होंने अपनी पहचान ज़मीन से जुड़े एक कार्यकर्ता के तौर पर बनाई और वे एक राजनेता के साथ-साथ एक कृषक भी थे।  मई-2014 में वह नरेन्द्र मोदी मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे, लेकिन उस के कुछ दिनों बाद ही 3 जून 2014 को दिल्ली में एक कार दुर्घटना में उनका देहान्त हुआ था।      Read politics गोपीनाथ मुंडे महाराष्ट्र राज्य में भारतीय जनता पार्टी के चेहरा थे। लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गोपीनाथ मुंडे महाराष्ट्र भारतीय जनता पार्टी के सबसे चमकदार चेहरे थे। मुंडे को महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की ओर से एकमात्र भीड़ जुटाने वाले नेता के तौर पर जाना जाता था। महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी को खड़ा करने वालों में उनका नाम लिया जाता था। गोपीनाथ मुंडे महाराष्ट्र के कद्दावर ओबीसी नेता थे। गोपीनाथ मुंडे पिछड़े वर्गों में अच्छा प्रभाव रखने वाले महत्पूर्ण...

रानी अहिल्याबाई होल्कर

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अहिल्याबाई का जन्म 31 मई सन् 1725 में हुआ था।  भारतीय वीरांगना अहिल्याबाई के पिता मानकोजी शिंदे एक मामूली किंतु संस्कार वाले आदमी थे। इनका विवाह इन्दौर राज्य के संस्थापक महाराज मल्हारराव होल्कर के पुत्र खंडेराव से हुआ था। सन् 1745 में अहिल्याबाई के पुत्र हुआ और तीन वर्ष बाद एक कन्या। पुत्र का नाम मालेराव और कन्या का नाम मुक्ताबाई रखा। उन्होंने बड़ी कुशलता से अपने पति के गौरव को जगाया। कुछ ही दिनों में अपने महान् पिता के मार्गदर्शन में खण्डेराव एक अच्छे सिपाही बन गये। मल्हारराव को भी देखकर संतोष होने लगा। पुत्र-वधू अहिल्याबाई को भी वह राजकाज की शिक्षा देते रहते थे। उनकी बुद्धि और चतुराई से वह बहुत प्रसन्न होते थे।  मल्हारराव के निधन के बाद उन्होंने पेशवाओं की गद्दी से आग्रह किया कि उन्हें क्षेत्र की प्रशासनिक बागडोर सौंपी जाए। मंजूरी मिलने के बाद 1766 में रानी अहिल्यादेवी मालवा की शासक बन गईं। उन्होंने तुकोजी होल्कर को सैन्य कमांडर बनाया। उन्हें उनकी राजसी सेना का पूरा सहयोग मिला। अहिल्याबाई ने कई युद्ध का नेतृत्व किया। वे एक साहसी योद्धा थी और बेहतरीन तीरंदाज। हाथी की...

निर्मला सीतारमण जी

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निर्मला सीतारमण निर्मला सीतारमण जी भारत की प्रथम पूर्णकालिक महिला वित्तमन्त्री हैं। सितम्बर २०१७ से मई २०१९ तक वे रक्षामंत्री रही थीं और उससे पहले वे भारत की वाणिज्य और उद्योग (स्वतंत्र प्रभार) तथा वित्त व कारपोरेट मामलों की राज्य मंत्री रह चुकी हैं। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबद्ध हैं तथा पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुकी हैं।  निर्मला सीतारमण जी भारत की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री भी रह चुकी हैं। निर्मला सीतारमण जी ने 1980 में सीतालक्ष्मी रामास्वामि कॉलेज, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु से स्नातक की शिक्षा पूर्ण की। निर्मला सीतारमण जी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विषय में एम॰फ़िल॰ की। निर्मला सीतारामन् प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स के साथ वरिष्ठ प्रबंधक (शोध एवं विश्लेषण) के तौर पर भी कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने कुछ समय के लिए बीबीसी विश्व सेवा के लिए भी कार्य किया। निर्मला सीतारमण जी हैदराबाद में स्थित प्रणव स्कूल के संस्थापकों में से एक हैं। निर्मला सीतारमण जी का जन्म 18 अगस्त 1959 में एक ब्राम्हण परिवार में हुआ था। इनक...

एक पिता की बेहतरीन पालना

पिता की ममता पिता की ममता- जिसे पढ़कर आपकी आंखें गीली हो जाएंगी । ममता के लिए एक स्त्री होना जरूरी नहीं होता । बेटी के द्वारा अपने पिता पर लिखा गया निबन्ध जिसे कहानी के शब्द रूपी मोतियों में पिरोया गया है । शहर के एक अन्तरराष्ट्रीय प्रसिद्धि के विद्यालय के बग़ीचे में तेज़ धूप और गर्मी की परवाह किये बिना, बड़ी लग्न से पेड़ - पौधों की काट छाँट में लगा था कि तभी विद्यालय के चपरासी की आवाज़ सुनाई दी, "गंगादास! तुझे प्रधानाचार्या जी तुरंत बुला रही हैं।" गंगादास को आख़िरी के पांँच शब्दों में काफ़ी तेज़ी महसूस हुई और उसे लगा कि कोई महत्त्वपूर्ण बात हुई है जिसकी वज़ह से प्रधानाचार्या जी ने उसे तुरंत ही बुलाया है। शीघ्रता से उठा, अपने हाथों को धोकर साफ़ किया और चल दिया, द्रुत गति से प्रधानाचार्या के कार्यालय की ओर। उसे प्रधानाचार्या महोदया के कार्यालय की दूरी मीलों की लग रही थी जो ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही थी। उसकी हृदयगति बढ़ गई थी। सोच रहा था कि उससे क्या ग़लत हो गया जो आज उसको प्रधानाचार्या महोदया ने तुरंत ही अपने कार्यालय में आने को कहा। वह एक ईमानदार कर्मचारी था और अपने...

कारगिल की सत्य घटना

सन् 1999 कारगिल_युद्ध .... तोलोलिंग पहाड़ी पर जंग जारी थी,  तोलोलिंग की वो पथरीली पहाड़ी  पूरे युद्ध के दौरान हुई कैजुल्टियों में से  लगभग आधी कैजुल्टियों के लिए  जिम्मेदार थी. कारगिल की सबसे पेचीदा, मुश्किल , और खूनी जंग यहीं लड़ी गई थी.  Artillery support के बगैर ही. 18 ग्रिनेडियर और 16 ग्रिनेडियर बटालियनो ने बेहिसाब नुकसान झेला था. महीने भर के संघर्ष और खून बहाने के बाद भी तोलोलिंग भारत की पहुँच से दूर थी. जनरल वेद प्रकाश मलिक के लिए ये एक चुनौती थी, क्योकि भारतीय आक्रमण की धार यहाँ आकर कुंद पड जाती थी. ग्रिनेडियर्स के लगातार धावे केवल उनकी कैजुल्टियों का फिगर बढ़ा रहे थे, मजबूरन एक नई और ताजा दम बटालियन को ये टास्क सौंपा गया था. कुपवाड़ा से एक नई बटालियन 2nd राजपूताना राईफल्स को 24 घंटे के अंदर गुमरी में रिपोर्ट करने को कहा गया,  केवल एक दिन के Acclimatization (मौसम और टैरेन के अनुसार ढलने की एक मिलिट्री टर्म ) के बाद ही बटालियन को लाँच करने प्लानिंग उनके कमांडिंग आॅफिसर Colonel- M.B.Ravindranath ने की थी. कर्नल रविंद्रनाथ ने बटालियन के चुनिंदा...

आप स्वर्णिम भारत को कैसे देखना चाहते हैं ?

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आपका स्वर्णिम✌ भारत यहां आप अपने स्वर्णिम भारत की तस्वीर को अपने शब्दों में कमेंट करें।