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करवा चौथ का व्रत हमारी आस्था क्यों❓

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🌺🌺🌺 मैं करवाचौथ पर व्रत क्यों रखूंगी ? 🦋🦋🦋  क्योंकि यह मेरा तरीका है आभार व्यक्त करने का उस के प्रति जो हमारे लिए सब कुछ करता है। मैं व्रत करूंगी बिना किसी पूर्वाग्रह के , अपनी ख़ुशी से।  🔔🔔🔔 अन्न जल त्याग क्यों ? 🦋🦋🦋 क्योंकि मेरे लिए यह रिश्ता अन्न जल जैसी बहुत महत्वपूर्ण वस्तु से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है। यह मुझे याद दिलाता है कि हमारा रिश्ता किसी भी चीज़ से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है। यह मेरे जीवन में सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के होने की ख़ुशी को मनाने का तरीका है।  🎷🎷🎷 सजना सवरना क्यों ? 👍👍👍 मेरे भूले हुए गहने साल में एक बार बाहर आते हैं। मंगलसूत्र , गर्व और निष्ठा से पहना जाता है। मेरे जीवन में मेहँदी , सिन्दूर ,चूड़ियां उनके आने से है तो यह सब मेरे लिए अमूल्य है। यह सब हमारे भव्य  संस्कारों और संस्कृति का हिस्सा हैं। शास्त्र दुल्हन के लिए सोलह सिंगार की बात करते हैं। इस दिन सोलह सिंगार कर के फिर से दुल्हन बन जाईये।  विवाहित जीवन फिर से खिल उठेगा।  🌺🌺🌺 कथा क्यों और वही एक कथा क्यों ? 🔥🔥🔥 एक आम जीव और एक दिव्...

मकर संक्रांति 2079 विक्रम संवत (2023) स्पेशल

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मकरसंक्रांति सम्पूर्ण भारतवर्ष में अलग अलग तरीकों द्वारा मकरसंक्रांति का पर्व बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस वर्ष यह त्यौहार माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (15 तारीख) को मनाया जा रहा है। "जब सूर्य धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करता है तब सूर्य के इस गतिशीलता को ही मकरसंक्रांति कहा जाता है। विविधता में एकता का जश्न " मकरसंक्रांति के अन्य नाम खिचड़ी,मकर संक्रमण, ताई पोंगल, माघी, शिशुर सेक्रांत,  भोगाली बिहू, उत्तरायण, पौष संक्रांति, माघी संक्रांति, दही चूरा, पेड्डा पांडुग (Pedda Panduga), मकर विलक्कु(Makara Vilakku), घुघुतिया, सोंगकरन, मोहा संग्रकान, उझवर तिरुनल, पी मा लाओ एवम् थिंयान आदि हैं।" पौराणिक कथा के अनुसार मान्यता है कि इस दिन गंगा जी भगीरथ का पीछा करते करते सागर में जा मिली थी। कहा भी जाता है कि "सब तीरथ बार बार गंगासागर एक बार" क्योंकि साल में सिर्फ इस दिन ही गंगासागर में स्नान दान के लिए लाखों की संख्या में भीड़ होती है इस दिन गंगा स्नान करके तिल के मिष्ठान आदि को ब्राह्मणों व पूज्य व्यक्तियों को दान दिया जाता ...

लोहड़ी

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लोहड़ी का अर्थ लोहड़ी को तिलोड़ी भी कहा जाता था। यह शब्द तिल तथा रोड़ी (गुड़ से बनी रोड़ी) को मिलाने से बना है, जो धीरे धीरे बदल कर लोहड़ी के रूप में प्रसिद्ध हो गया। पंजाब के कई इलाकों मे इसे लोही व लोई भी कहा जाता है। जश्न मनाने का अनोखा भारतीय उत्सव लोहड़ी एक त्यौहार है, जो आनंद और खुशियां लाती है। लोहड़ी का त्यौहार मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व मनाया जाता है और वर्ष 2022 में यह त्यौहार 13 जनवरी को मनाया जा रहा है। पंजाब और हरियाणा में इसकी काफी धूम होती है। सिंधी समाज भी मकर संक्रांति के एक दिन पूर्व इसे ‘लाल लोही’ के रूप में मनाता है। लोहड़ी की परंपरा "लोहड़ी के त्योहार के अवसर पर जगह-जगह अलाव जलाकर उसके आसपास भांगड़ा क‍िया जाता है और तिल, गुड़ और मक्का अग्नि को भोग के रूप में चढ़ाई जाती है।"   उत्सव के दौरान वैसे तो घर-घर जाकर लोक गीत गाने की परंपरा है।  बच्चों को इस दिन गजक, गुड़, मूंगफली एवं मक्का आदि दिया जाता है, जिसे लोहड़ी भी कहा जाता है। आग जलाकर लोहड़ी को सभी में वितरित किया जाता है पुरुष भांगड़ा तो महिलाएं गिद्धा नृत्य करती हैं।  रात में स...