🚩नीरज स्मृति 1🚩
अपनी बेटी की सुन लो पुकार मेरी मां, साथ सजन के तन पे हो लाली चुनर। तेरा होगा बड़ा उपकार मेरी मां। तेरा होगा बड़ा उपकार मेरी मां। तेरी बेटी का सिंदूर हो अजर ,अमर। अपनी बेटी की सुन ले पुकार मेरी मां.....। जब मंदिर में सोहे मुझे तेरी ही मूर्ति। मेरी नैया मेरे खेवैया बिन किस काम की। इस बगिया का माली सदा ही सलामत रहे। माला जपती हूं मै सदा ही तेरे नाम की। माला जपती रहूंगी तेरे नाम की। दया मुझपर भी करना मेरी दयावान मां। साथ साजन के तन पर हो लाली चुनर......। मेरे जीवन का मालिक है मेरे सजन। उम्र मेरी भी उसको दे देना मां, बस इसके शिवा कुछ मांगती नहीं। इस दिल में है बस यही अरमान मां। इस दिल में है बस यही अरमान मां। अपनी बेटी की सुन लो पुकार मेरी मा। साथ सजन के तन पर हो लाली चुनर। नीरज स्मृति🚩

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