सुनो जरा..



समंदर सी लहरें हैं तुझमें और मैं किनारे पर रूकी एक कश्ती , किसी रोज़ मुझे भी अपने साथ बहाकर ले जाना।

 ज्यादा महंगी नहीं हैं ख्वाहिशें मेरी , तुम यूंही रोज़ सपनों में आकर अपनी आवाज़ सुनाते जाना।

 मुझे ये शिकायत नहीं कि तू मेरा नहीं , बस बर्दाश्त नहीं है तेरा यूं किसी और के पास चले जाना।

 जब डसने लगे तुझे दुनिया भर की उलझनें , तो थक- हार कर कभी मेरे दर भी आ जाना।

 ये दिल मेरा और कुछ भी नहीं बस तेरा घर ही तो है , जो मिले फुर्सत ज़माने से तो अपने घर भी आ जाना।   

                    - Deepika
(Give a smile to everyone 😊)

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