कहानी 11 : श्रवण कुमार

 

1. बच्चों को सुनाने की कहानी

बहुत समय पहले एक बालक था — श्रवण कुमार।

वह अपने माता-पिता से बहुत प्यार करता था।

उसके माता-पिता अंधे थे।

वे कहीं जा नहीं सकते थे।

श्रवण कुमार ने सोचा

“मैं अपने माता-पिता को तीर्थ यात्रा कराऊँगा।”

उसने एक कांवड़ बनाई।

दोनों तरफ टोकरी रखी और अपने माता-पिता को बैठाया।

वह उन्हें अपने कंधों पर बैठाकर

जंगल-जंगल, गाँव-गाँव घुमाने लगा।

एक दिन वह पानी लेने गया।

उसी समय राजा दशरथ शिकार कर रहे थे।

उन्हें लगा कोई जानवर पानी पी रहा है।

उन्होंने तीर चला दिया।

तीर जाकर श्रवण कुमार को लग गया।

श्रवण कुमार गिर पड़ा।

राजा दौड़कर आए और दुखी हो गए।

श्रवण कुमार ने कहा

“राजा जी… मेरे माता-पिता को पानी दे दीजिए…”

और फिर उसने अपने प्राण त्याग दिए।

राजा जब उसके माता-पिता के पास पहुँचे

तो वे बहुत दुखी हुए।

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सीख

हमें हमेशा माता-पिता की सेवा और सम्मान करना चाहिए।

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2. आवाज़ ट्रेनिंग

जगह कैसे बोलें

कहानी शुरू शांत

माता-पिता का प्यार भावुक

तीर लगना थोड़ा तेज़

अंतिम संवाद धीमी और दुखी

अंत गंभीर

उदाहरण

“राजा जी… मेरे माता-पिता को पानी दे दीजिए…”

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3. स्टेज ट्रेनिंग


पात्र

1 श्रवण कुमार

2 माता-पिता

1 राजा दशरथ

2 पेड़

स्टेज सजावट

डंडा + टोकरी = कांवड़

नीला कपड़ा = नदी

हरा कपड़ा = जंगल

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स्टेज संवाद

श्रवण कुमार

“मैं अपने माता-पिता को तीर्थ यात्रा कराऊँगा।”

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माता-पिता

“बेटा, तुम बहुत अच्छे हो।”

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राजा दशरथ

“अरे! यह क्या हो गया…”

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4. ग्रुप खेल

खेल : सेवा करो

बच्चों को जोड़ों में बाँटें

एक बच्चा “माता-पिता” बनेगा

दूसरा बच्चा “सेवा करेगा”

जैसे

पानी देना

हाथ पकड़ना

सहारा देना

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5. अभिनय खेल


6 बच्चों का समूह

श्रवण कुमार

माता

पिता

राजा

2 पेड़

बच्चे पूरी कहानी अभिनय करेंगे।

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6. बच्चों से पूछने वाले सवाल

1 श्रवण कुमार कौन थे?

2 उन्होंने क्या किया?

3 राजा ने क्या गलती की?

4 हमें माता-पिता के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?

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7. संस्कार अभ्यास

बच्चों से कहें

आज से

माता-पिता की बात मानेंगे

उनकी मदद करेंगे

उनका सम्मान करेंगे

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अब हम 11 कहानियाँ पूरी कर चुके हैं 🙏

अगर आप चाहें तो अगली कहानी और भी बहुत प्यारी है:

👉 कहानी 12 : गणेश जी की परिक्रमा

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