कहानी 10 : सच बोलने वाला बालक
1. बच्चों को सुनाने की कहानी
एक गाँव में एक छोटा सा बालक रहता था।
वह बहुत सीधा और सच्चा था।
एक दिन वह घर में खेल रहा था।
खेलते-खेलते उसने गलती से एक घड़ा तोड़ दिया।
“धड़ाम!!!”
बालक डर गया।
उसे लगा कि माँ उसे डाँटेंगी।
लेकिन उसने सोचा
“मुझे सच बोलना चाहिए।”
जब माँ आईं,
तो बालक बोला
“माँ, मैंने गलती से घड़ा तोड़ दिया।”
माँ ने पहले उसे देखा…
फिर मुस्कुराईं।
माँ बोलीं
“तुमने सच बोला, मुझे तुम पर गर्व है।”
और उन्होंने उसे प्यार किया।
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सीख
गलती हो जाए तो भी हमेशा सच बोलना चाहिए।
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2. आवाज़ ट्रेनिंग
जगह कैसे बोलें
कहानी शुरू शांत
घड़ा टूटना “धड़ाम!” जोर से
बच्चा डरना धीमी आवाज
सच बोलना साफ और धीमी
माँ खुश होना प्यार भरी आवाज
उदाहरण
“माँ… मैंने घड़ा तोड़ दिया…”
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3. स्टेज ट्रेनिंग
पात्र
1 बालक
1 माँ
2 घर के सदस्य (वैकल्पिक)
स्टेज सजावट
मिट्टी का बर्तन = घड़ा
घर जैसा सेट
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स्टेज संवाद
बालक
“मैं खेल रहा हूँ…”
(घड़ा टूटता है)
“ओह! अब क्या करूँ?”
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माँ
“यह किसने किया?”
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बालक
“माँ, मैंने किया।”
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4. ग्रुप खेल
खेल : सच बोलो
शिक्षक बच्चों से छोटे सवाल पूछे
जैसे
“अगर तुमसे गलती हो जाए तो क्या करोगे?”
बच्चे जवाब देंगे
✔ “सच बोलेंगे”
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5. अभिनय खेल
3–4 बच्चों का समूह
बालक
माँ
घर के सदस्य
बच्चे पूरी कहानी अभिनय करेंगे।
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6. बच्चों से पूछने वाले सवाल
1 बालक ने क्या तोड़ा?
2 वह क्यों डर गया?
3 उसने क्या किया?
4 माँ ने क्या कहा?
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7. संस्कार अभ्यास
बच्चों से कहें
आज से
गलती छुपाएँगे नहीं
सच बोलेंगे
डरेंगे नहीं
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अब हम 10 कहानियाँ पूरी कर चुके हैं 🎉
यदि आप चाहें तो अगला चरण शुरू करते हैं:
👉 कहानी 11 : श्रवण कुमार (माता-पिता सेवा)
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