★।। सिंपल और सैंपल ।।★

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        🌼🌹🌼꧁!! ओम शांति !!꧂🌼🌹🌼

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                           ✿ ड्रिल ✿


✿==>> अब हम सभी आत्माएं ब्रहमा बाबा की विशेषता को अपने में धारण करेंगे...ब्रह्मा बाबा सदा सिंपल और सैंपल बनकर रहे... हम बच्चों को भी बाबा की तरह ही सिंपल और सैंपल बनना है... कैसे ब्रह्मा बाप साकार सृष्टि में सिंपल रहते भी सभी के आगे सैंपल बने... साधारणता में महानता अर्थात रायल्टी का अनुभव बाबा ने कराया... बेग्गरी जीवन में भी बेफिक्र बादशाह की स्थिति का अनुभव बाबा ने किया... ब्रह्मा बाप के बोलचाल, चेहरे और चलन से सदा रायल्टी दिखाई देती थी... ऐसे हम बच्चों को भी ब्रह्मा बाबा को फालो करना है... जो जितना सिंपल अर्थात सादगी पसंद है वही सैंपल बन अपनी तरफ आकर्षित करता है ब्रह्मा बाबा की तरह... तो मंसा संकल्पों में, सम्बन्ध में, व्यवहार और रहन-सहन में हम बच्चों को बाबा की तरह सिंपल बनना है... सिंपल अर्थात साधारणता में भी महानता व रायल्टी का अनुभव करना और कराना... तो आज हम सिंपल और सैंपल ब्रह्मा बाबा की तरह बनने का मिलकर पुरुषार्थ करना है... 


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✿==>> मैं ब्राह्मण आत्मा अपने को टावर ऑफ़ पीस के ऊपर खड़ा हुआ एकदम शांत अवस्था में बाबा की याद में मगन खड़ा हुआ अनभुव करती हूँ... कुछ देर के लिए यहाँ की शांति में मैं आत्मा बिल्कुल अपने को समा देती हूँ... लग रहा है जैसे की मेरे बिल्कुल आसपास बापदादा खड़े मुझे दृष्टि दे रहे हों... मैं अपने को इस दृष्टि से भरता हुआ अनुभव करती अपने ब्राह्मण रूप को मन की आंखों से देख रही हूँ... कितना सुन्दर लेकिन कितना साधारण आकर्षित कर देने वाला स्वरूप ईश्वर के द्वारा ज्ञान रत्नों से बाबा के प्यार से बना हुआ बाबा के द्वारा किरणों से बना हुआ स्वरुप अनुभव हो रहा है... सफेद वस्त्रों में ढकी मैं ब्राह्मण आत्मा चेहरे पर एकदम साधारण लेकिन बाबा की किरणों से चमकता हुआ एक दिव्य स्वरुप दिखाई दे रहा है... दिल के पास लगा हुआ बाबा का बैच बिल्कुल एक मेडल के समान मेरे इस ब्राह्मण स्वरुप में चमकता हुआ दिखाई दे रहा है...


✿==>> मैं अपने इस सिंपल पर अति आकर्षित स्वरूप को बहुत गहराई से अपने में बिठाने लगती हूँ... इस स्वरूप में इस चेहरे में मेरी चलन में कोई बाहरी कोई माया की हलकी सी भी परछाई दिखाई नहीं देती... कितना सिंपल पर बाबा की किरणों से बनाया हुआ स्वरूप कितना दिव्य दिखाई दे रहा है... इस साधारण स्वरूप में महानता की झलक बाबा के द्वारा दिखाई दे रही है... और इतना अदभुत अनुभव हो रहा है जैसे कि मैं बिल्कुल अपने ब्रह्मा बाबा की तरह बन चुकी हूँ... एकदम सिंपल और सैंपल... कितनी रायल्टी का अनुभव हो रहा है इस साधारण से दिखने वाले इस ब्राह्मण स्वरुप से और आसपास से बाबा की चमकती हुई किरणें मुझे और ज्यादा रॉयल बनाती जा रही हैं... जो लग रहा है कि बापदादा मेरे आसपास मेरे चारों तरफ हों... मैं आत्मा बेफिक्र बादशाह की स्थिति का अनुभव करती आत्मा आज अपने भाग्य पर बहुत ज्यादा इतरा रही हूँ बिल्कुल ब्रह्मा बाबा की तरह अनुभव कर रही हूँ... 


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✿==>> मुझ आत्मा को अपने चेहरे और चलन से, अपनी बोलचाल से रॉयलटी का अनुभव हो रहा है... कितनी सिम्प्लिसिटी है इस स्वरूप में, कितनी सादगी है इस स्वरूप में और चारों तरफ से आती बाबा की किरणें मुझमें समाती ये किरणें इस स्वरूप को और ज्यादा जगमगा रही हैं... मुझ आत्मा के मन के संकल्प, मुझ आत्मा के सारे सम्बन्ध, व्यवहार, रहन-सहन सबकुछ सिंपल साधारण लेकिन बापदादा के द्वारा महान बन चुका है... इस साधारणता में कितनी रॉयलटी का अनुभव हो रहा है... ये मन को लुभाने देने वाली रॉयलटी अदभुत है... मैं ब्राह्मण आत्मा कुछ देर के लिए अपने इस स्वरूप में टिक जाती हूँ...


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✿==>> इस स्वरूप को बनाने वाले बापदादा मेरे आसपास अपनी किरणों का समुन्द्र बहाते जा रहे हैं और ये किरणें मेरे स्वरूप को और ज्यादा निखारती ही जा रही हैं... कितनी भाग्यवान हूँ मैं आत्मा जो ईश्वर स्वयं मुझ आत्मा को बना रहे हैं... मेरा स्वरूप बना रहे हैं... कितनी भाग्यवान हूँ मैं आत्मा जो मेरे ब्रह्मा बाबा साकार में न होते हुए भी मुझ अपनी बच्ची को साकार का अनुभव करा रहे हैं... अपने भाग्य के गीत गाती अपने इस साधारण पर महान स्वरूप को रॉयल स्वरूप को अनुभव करती मैं ब्राह्मण आत्मा एकदम ब्रह्मा बाबा की तरह फरिश्ता बन चुकी हूँ... शुक्रिया बापदादा शुक्रिया... इस सुखदायी अनमोल स्वरूप के लिए... 

ॐ शांति ..

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