रक्षाबंधन विशेष
माताओं - बहनों से विनम्र निवेदन।
ज़रा साेचें!
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राखी के त्यौहार पर राखियाें की ख़रीदी भारत में करीब 1400 कराेड़ की हाेती हैं! जिसमें चीन 1275 कराेड़ रूपया भारत से कमा कर ले जाता है!
हमारी बहनें लोग ₹100/- से ₹1500/- की राखियाँ ख़रीद कर भाईयों काे बॉधती हैं! जब कि राखी एक तीन रंग की माेली धागे सें प्रारंम्भ हुआ त्याेहार था! जिसकाे राखियाँ बनाने वाले व चीन के मेन्युफेक्चरर ₹2000/- की राखी तक ले गये हैं! आप हम देखते हैं कि यह एक भावनाओं का त्यौहार है! बहनें व भाई लंम्बी दूरी से राखी बांधने सुविधानुसार एक दूसरे के यहां आते जाते हैं, या पत्र के माध्यम से राखी भेजते हैं, राखी बांधनें का मतलब है भाई तू मेरे बुरे समय में रक्षा करना! रक्षाबंन्धन पर भाई भी अपनी बहनाें काे उपहार रूप में काेई वस्तु व नगद देता है! लेकिन आजकल 50% ऐसा हाेता दिख रहा है कि बहन की राखी बहुत ही कीमती होती है, व भाई लोग उपहार देते समय कुछ संकोच व लज्जा का अनुभव करते हैं,
इसलिए हम कुछ ज़्यादा बहन काे दे नहीं सकते ताे कम से कम उनकाे ज़्यादा खर्च ताे मत करवायें! सभी भाईयों काे प्रण करना चाहियें कि हम सिर्फ बहन से माेली धागा ही बंधायेंगे! और जाे देना है बहन काे, वह अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार देते रहेंगे!
आप हम देखते हैं, कि राखियाँ हम सब 2 से 4 घंन्टे या शाम तक ही बाँध रख पा रहे हैं! और बहन का सैकड़ाे रूपया उस राखी पर लगा था! जाे 2 से 3 घन्टे में स्क्रेप (बेकार कूड़ा) हाे गया! कृपया सुधार करके अपने पुराने माेली धागा या रेशम की सुन्दर गुँथी हुई राखी बाँधे ताे आपका बीरा (भाई ) साल भर भी बांधे रखेगा!
बहनें यथासम्भव स्वयं अपने हाथ से पेपर, धागे, रुद्राक्ष, आदि की सहायता से हस्तनिर्मित राखी बनाएं, यह बहुत जबरदस्त कदम होगा
आइए आत्मनिर्भर बनें
व
अपना त्यौहार मनाएं
ये चीन और पाकिस्तान ही हैं जिन्होंने मिलकर हमारी कितनी ही बहनों का सुहाग उजाड़ा है।
और तो और ये नाशमिटा कोरोना भी है चाइना की देन , कुछ तो समझो मेरी बहन
सभी बहनों से निवेदन है कि इसको सच में पोजिटिव लें और भयंकर युद्ध स्तर पर इसका पालन करें सादगीपूर्ण व घर में मिठाइयां बनाकर मिलावटी व चाईना फर्जी मार्केट को सबक सिखा दें🌹
मातृशक्ति नारीशक्ति

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