कुम्भ नगरी प्रयागराज

ॐ
दिव्य कुम्भ


कुंभ नगरी प्रयागराज में आप सभी का स्वागत है।  
हर 12 साल में माघ मेला कुंभ मेले में बदल जाता है। लाखों भक्त नदियों के किनारे शिविर लगाते हैं और रोजाना गंगा जी के पवित्र जल में स्नान करते हैं, जबकि धार्मिक संगठनों और संप्रदायों ने इस अवधि के दौरान नदी के किनारे अपने शिविर स्थापित किए हैं। यह मेला 2079 विक्रम सम्वत (2023 ग्रेगोरियन वर्ष) में पौष माह में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा (06 जनवरी) से शुरू होगा और फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (18 फ़रवरी) को महा शिवरात्रि के दिन समाप्त होगा।



इस बार प्रमुख स्नान पर्व पर माघ मेले में
06 जनवरी को पौस पूर्णिमा, 
15 जनवरी को मकर संक्रांति,
21 जनवरी को मौनी अमावस्या, 
26 जनवरी को बसंत पंचमी, 
05 फरवरी को माघ पूर्णिमा एवम्
18 फरवरी को महा शिवरात्रि पर असंख्य जनसमूह प्रयागराज के माघ मेले क्षेत्र में संगठित होगा। 
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सैकड़ों वर्षों से चले आ रहे इस माघ मेले में 
प्रयागराज के गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र तट पर हर साल यह मेला लगता है। संगम भारत के सर्वाधिक पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। प्रयागराज का माघ मेला दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। हिंदू पुराणों में इसका वर्णन आता है।
2076 विक्रम सम्वत से स्वच्छता अभियान को केंद्र में रखते हुए उत्तर प्रदेश के कीर्तिमान मुख्यमंत्री आदरणीय योगी जी ने काफी अधिक धनराशि का वितरण किया है। 
पूरे कुंभ क्षेत्र को 4 टेंट खंडों में बांटा जाता है
जिनके क्रमशः नाम कल्पवृक्ष, कुंभ कैनवास, वैदिक टेंट सिटी एवं इंद्रप्रस्थम सिटी रहती है। हर खंड में टेंट में निवास करने वाले कल्प वासियों के लिए पानी,  बिजली,  खाना बनाने के लिए गैस एवं शौचालय एवं नित्य कर्म से निवृत्त होने के लिए विशाल संख्या में पुनर्निर्मित शौचालय कोटरों को स्थापित किया जाएगा। 
घाटों को सुरक्षित एवं दृढ़ बनाने के लिए प्लास्टिक के पीपों  को जोड़कर सुरक्षित सीमा रेखा का निर्माण किया जाएगा ताकि लोग गहरे पानी में स्नान करने का खतरा ना उठाएं। पूरे घाट पर जल पुलिस नौका संसाधनों के द्वारा अपनी सतर्कता बनाए रखेगी।  किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कर्मचारियों को स्ट्रीमर चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता रहता है। 



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